Dr Anamika Ambar Poem Collections

I have been hearing Dr Anamika Jain Amber for quite some time. And recently, this poem “Rukmini”, I have become a fan of her. She is beautiful, and very smart. Her witty style of poem-reciting is very nice. These are some of her poems which I love.

शाम भी ख़ास है वक़्त भी ख़ास है
मुझको एहसास है तुझको एहसास है
इससे ज़्यादा हमें और क्या चाहिए
मैं तेरे पास हूँ , तू मेरे पास है

मैं तुझे जान लूँ, तू मुझे जान ले परे
मैं भी पहचान लूँ तू भी पहचान ले
है बहुत ही सरल प्रेम का व्याकरण
तेरी मैं मान लूँ मेरी तू मान ले

मेरा मन  तू बने तेरा मन मैं बनूँ
ऐसे पूजूँ तुझे ख़ुद नमन मैं बनूँ
एक ही प्रार्थना है प्रभू से मेरी
हर जन्म में तेरी ही दुल्हन मैं बनूँ

चाँद बिन चाँदनी रात होती नहीं
ना हो बदल तो बरसात होती नहीं
शब्द मजबूर हैं, व्यक्त क्या क्या करें
प्रेम जब हो मुखर बात  होती रहे

प्रीत में इक रतन मैं जड़ूँ तुम जड़ो
एक नया व्याकरण मैं गढ़ूँ तुम गढ़ो
उलझनें सब  सुलझ जाएँगी पल में ही
ईक क़दम  ईक क़दम मैं बढ़ूँ तुम बढ़ो

अनमोल हूँ मैं तुम तो मेरा दाम नहीं हो
मैं जिसको याद रखूँ ऐसा नाम नहीं हो
मिल जाएँगी तुम्हारी गोपियाँ तुम्हें कहीं
मैं जिसकी राधिका हूँ तुम वो श्याम नहीं हो

मैं तेरे नाम हो जाऊँ तू मेरे नाम हो जाए
मैं तेरा दाम हो जाऊँ तू मेरा दाम हो जाए
ना राधा सा ना मीरा सा विरह मंज़ूर है मुझको
बनूँ मैं रुक्मणी तेरी तू मेरा श्याम हो जाए

ये दरिया भी नहीं लेकिन समंदर चाहिए इनको
ज़रा देखो अनामिका सा अंबर चाहिए इनको
बड़े करके जतान लड़की के मन को पहले
फिर उसके संग सहेली का भी नम्बर चाहिए इनको

नज़र अनजान भी रखना मगर पहचान भी रखना
करो मासूम शैतानी तो फिर ईमान भी रखना
खुले मन से नए रिश्तों का स्वागत भी करो लेकिन
ज़रूरी है बुज़ुर्गों का सदा सम्मान भी रखना

जैसा तन दिख रहा वैसा मन कीजिए
ऐसा वैसा ना कोई जतन कीजिए
तीर्थ के दौर में प्रेम करते नहीं
ये उम्र है भजन की भजन कीजिए

मोहब्बत के सफ़र को एक हँसी आग़ाज़ दे देना
मेरा कल मुस्कुरा उठे तुम ऐसा आज दे देना
वफ़ाएँ देख लेना तुम तुम्हारी प्यार की ख़ातिर
चली आऊँगी मैं सब छोड़ कर आवाज़ दे देना

मेरे कॉलेज का एक लड़का जो लिख कर प्रीत देता था
वो दिल के साज को मेरे नया संगीत देता था
वो पागल था दीवाना था वो भोला था सयाना था
हमेशा हार कर मुझसे मुझे वो जीत लेता था ।

नज़र भर देख लूँ उसको दुआ दिन रात करती थी
मगर ज़ाहिर नहीं दिल के कोई जज़्बात करती थी
यही था प्यार शायद चाँद तारों से अकेले में
वो मेरी बात करता था मैं उसकी बात करती थी

मेरे अन्दाज़ को अपना अलग अन्दाज़ दे देना
चली आऊँगी मैं सब छोड़ कर
तुम्हारे ही लिए ये गीत ये ग़ज़लें लिखी मैंने
सुनाती  हूँ तुम्हें तुम तालियों का आग़ाज़ दे देना

अगर है पास वो तो हिचकियाँ अच्छी नहीं लगती
बिना मौसम के बादल बिजलियाँ अच्छी नहीं लगती
मिले रेस्पॉन्स तो लड़के बहुत तारीफ़ करते हैं
जो ठुकरा दें उन्हें वो लड़कियाँ अच्छी नहीं लगती

मोहब्बत जिनको होती है मुक़द्दर रूठ जाता है
मुसाफ़िर संग जो चलता है सफ़र में छूट जाता है
दिलों से खेलने मत दो कभी नादान लोगों को
खिलोना काँच का है ये की अक्सर टूट जाता है

 


English version

mohabbat jinko hoti hai, muqaddar rooth jata hai
musafir sang jo chalta saE far mein choot jata hai
dilon se khelne mat do kabhi naadaan logon ko
khilona kaanch ka hai ye, ki aksar toot jata hai

agar hai paas woh to hichkiyan acchi nahi lagti
bina mausam ke badal bijliyan acchi nahi lagti
miley response to ladke bahut tareef karte hain
jo thukra dein unhe woh ladkiyan acchi nahi lagti

mohabbat ke safar ko ek hansi aagaz de dena
mera kal muskura uthe tum aisa aaj de dena
wafaein dekh lena tum tumhari pyar ki khatir
chali aaongi sab kuch chod kar awaaz de dena

main tere naam ho jaoon, tu mere naam ho jaye
main tera daam ho jaoon, tu mera daam ho jaye
na radha sa- na meera sa- virah manzoor hai mujhko
banoon main rukmani teri, tu mera shyam ho jaye.

anmol hoon main, tum to mera daam nahi ho
main jisko yaad rakhoon aisa naam nahi ho
mil jaengi tumhari gopiyan tumhe kahin
main jiski radhika hoon tum woh shyam nahi ho

sham phi khaas hai waqt bhi khaas hai, mujhko ehsaas hai tujhko ehsaas hai
isse zyada humein aur kya chahiye main tere paas hoon, tu mere paas hai,

ek rishta naya reshmi sa buno maine tumko chuna tum bhi mujhko chuno
zindagi prem ki hai kahani jise, tum kaho main sunooon, main kahoon tum suno.

nazar anjaan bhi rakhna magar pehchaan bhi rakhna
karo masoom shaitani to phir imaan bhi rakhna
khule man se naye rishton ka swagat bhi karo lekin
zaroori hai buzurgon ka sada samman bhi rakhna

Jaisa tan dikh raha waisa man kijiye, aisa waisa na koi jatan kijiye
teerth ke daur mein prem karte nahin, ye umar hai bhajan ki bhajan kijiye

 

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